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छद्म पंथनिरपेक्षता और सामाजिक भेदभाव के विरूद्ध स्वतंत्र अभिव्यक्ति

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माँ मुझे भाई से ज्यादा चाहती है ||

Posted On: 10 May, 2015 कविता में

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मुझे दुलारती है
पुचकारती है
प्यार जताती है
माँ मुझे भाई से ज्यादा चाहती है |

कई कई दिन बाद
जाता हूँ में जब घर
अपने हाथों से मेरी पसंद का वो मुझे
खाना खिलाती है
माँ मुझे भाई से ज्यादा चाहती है |

मौज मस्ती कर
खेल कूद कर जब
मैं थक कर घर आता हूँ
प्यार से वो मेरा
सर सहलाती है
माँ मुझे भाई से ज्यादा चाहती है |

ड़ कर, झगड़ कर
चोट खाकर, खाई खद्दो में गिर कर
जब जब मैं अपने
घुटने छिलवाता हूँ
तब तब मेरे घावों पर
स्नेह का मलहम लगाती है
माँ मुझे भाई से ज्यादा चाहती है |

ल पल पर, पग पग पर
करता हूँ मैं गलतियाँ
हर गलती पर, गुस्ताखी पर
करती है माफ़ मुझे
पापा के डंडे से
रोज बचाती है
माँ मुझे भाई से ज्यादा चाहती है |

ताने देती है जब
मुझे सारी दुनिया
कहती है कि तू
निठल्ला है, नाकारा है
तब मेरी माँ मुझे
न्यूटन सा
होशियार बताती है
माँ मुझे भाई से …….

Happy Mothers Day ..
Love you maa ..



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